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नयेअब गुल खिलाना चाहती है। ये खुलकर मुस्कुराना चाहती है। दिलों में  घर  बनाना  चाहती है। नहीं  कोई   ख़ज़ाना  चाहती है। शिकायत हर मिटाना चाहती है। सियासत  को  हराना चाहती है। नहीं कुछ भी  पुराना चाहती है। नये  नग़मे   सुनाना  चाहती है। अदावत को मिटाना चाहती है। समयअच्छा बिताना चाहती है। जहां को जगम…
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"जीत कर दिखाऊँगा"
मैं हारा नहीं हूँ, बस असफल हुआ हूँ!. विजय पाने में सिर्फ, विफल हुआ हूँ!!. मैं पुनः प्रयास करुँगा, कर्म से ना डरूँगा!. पूरे जोश से बढूँगा, विजय सोपान चढूँगा!!. चढ़ते ही जाऊँगा, शिखर चढ़ दिखाऊंगा!. गगन तक मैं अपना, पताका फहराऊँगा!!. विजय-श्री पताका, लहराते ही आऊँगा!. कसम खा कर कहता हूँ, जीत …
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ईमानदारी की रोटी
अपनी मेहनत से जो ईमानदारी की रोटी खाते हैं। किसानों के दुःख दर्द सिर्फ वे लोग ही बुझ पाते हैं‌। झूठ फरेब और धोखाधड़ी  जिन लोगों का पेशा है। वे भला क्या समझ सकते  किसानी करना कैसा है। चाहे कैसी भी सर्दी,गर्मी हो  या हो वर्षा मूसलाधार। किसान दिन-रात डटे रहते  चाहे खेत हो या बधार। सूरज निकलने से पहले …
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गज़ल
जो  हमारे  थे  हरदम   हमारे     लगे। हर  घड़ी  जान  से हम को प्यारे लगे। नाम लेकर खुदा का सफर पर चला, इस लिए  पास हरदम  किनारे  लगे। अब खुदाई का दावा मियाँ क्या करें, हाथ वो  भी  वहाँ  जब  पसारे  लगे। कौन  दहकान  का हाल  पूछे  यहाँ, हाथ  हरदम सभी बस  पसारे  लगे। सिर्फसैनिकरहे कलतलक जोहमीद, देश  पर …
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