गुरुजन ही पँख लगाते हैं
तमतोम मिटाते हैं जग का , गुरुजन धरती के दिनकर हैं। हैं अंक सजे निर्माण प्रलय, शिष्यों हित प्रभु सम हितकर हैं । शुचि दिव्य ज्ञान के दाता वह  ,सोने को पारस मे बदले। वह सृजनकार वह चित्रकार , वह मात पिता सम सुधिकर हैं । कच्ची मिट्टी को गढ़कर के , वह  सुन्दर  रूप सजाते  हैं । देते  खुराक   मे  संस्कार , …
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अच्छा लगा
तेरा ज़िंदगी में आना,अच्छा लगा  हँसना,रुठना,मनाना,अच्छा लगा। जरा जरा सी बातों पर तुनक कर  तेरा मुँह को फुलाना,अच्छा लगा। महफ़िल में या यूँ ही अकेले कहीं तेरा गले से लगाना,अच्छा लगा। सौंपकर मुझको खुशियाँ अनमोल  तेरा यूँ नखरे दिखाना अच्छा लगा। तुझ पे लिखा हूँ जितनी भी नज़्में  तेरा उनको गुनगुनाना अच्…
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गुरु की प्रतिमा
सदियों से हम सुनते आए,  गुरु महिमा गुणगान । गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु , गुरु गुणों की खान ।। मगर एक शिष्य ने गुरु का , मान बढाया था  । तन से मन से जिसने गुरु को  , शीश नवाया था ।। भील बालक था विद्या अभिलाषी , दिल मे इच्छा फ़ली थी । शिक्षा पाना गुरु द्रोण से ,  ऐसी ज्योत जली थी ।। ले याचना पहुचा सन्मु…
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