---- बेबसी ---
अभी हम लोगों ने होश हीं संभाला था। शाम होते ही गली में हम सब बच्चे खेलने निकल जाते थे । हम सब बच्चे गली में बैट बॉल खेलते  ,हमारी   बॉल हमेशा शर्मा अंकल के घर में चली जाती, हम सब एक साथ चिल्लाने लगते, अंकल हमारी बॉल दे दीजिये। वह बिना कुछ कहे मुस्कुराते हुए हमारी  बॉल  वापस कर देते और बोल…
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महत्वाकांक्षा
मनीषा आज बहुत खुश थी...। आज उसे एक बड़ी प्रतिष्ठित कंपनी से ऑफर आया था..। मनीषा अपने पति प्रतीक के आने का इंतजार कर रही थी ..। वह जानती थी कि प्रतीक  इसके लिए जरूर कुछ बोलेगा..। मनीषा की अभी शादी को एक साल ही हुआ था । उसके कोई बच्चा नहीं था....। मनीषा और प्रतीक एक मामूली सी कंपनी में जॉब करते थे। प…
घर
मैं झूले वाली कुर्सी पर बैठा था, ये कुर्सी मुझे मेरे बेटे ने लाकर दी थी। मेरा बेटा, विवेक! कहा था पापा आपको बड़ा शौक था ना ऐसी कुर्सी का, तो बस अब आप आंनद लीजिए। मैं भी बड़ा खुश हुआ, दिल गदगद हो गया, मेरा छोटा सा बेटा कितना बड़ा हो गया। मोहल्ले भर के लोगों को बारी बारी से चाय पर बुलाता था ताकि उन्ह…