'दम तोड़ती मानवता के गाल पर तमाचा है'पुस्तक पैसा बोलता है।
पिछले दिनों मैं संगम नगरी प्रयागराज की साहित्यिक यात्रा पर था।प्रयागराज के सुप्रिसिद्ध कवियों,शायरों से मुलाकात हुई।इस दौरान देश के युवा कुशल व्यंग्यकार गंगा प्रसाद त्रिपाठी 'मासूम' द्वारा विरचित काव्य कृति 'पैसा बोलता है' प्राप्त हुई।काव्य संग्रह का सघन अध्ययन करने के पश्चात मैंने …
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बहुसंख्यक पाठकों का प्रतिनिधित्व है ‘लल्ला और बिट्टी’ किताब
मनोहर चमोली ‘मनु’ युवा साहित्यकार एवं पत्रकार शिव मोहन यादव की बाल कहानियों का संग्रह ‘लल्ला और बिट्टी’ पाठकों के लिए उपलब्ध है। लखनऊ के लोकोदय प्रकाशन से प्रकाशित इस संग्रह में पन्द्रह सरल, सुलभ बाल कहानियाँ शामिल हैं। डिमाई आकार में प्रकाशित इस किताब का फोंट, बुनावट आकर्षक है। पाठकों को थकाता नही…
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साहित्यसुधा के प्रेमियों का नववर्ष मंगलमय हो विषय- साहित्यसुधा का जनवरी(प्रथम), 2021 अंक
मान्यवर,      ‘सहित्यसुधा ’  के प्रेमियों को यह  बताते हुए हर्ष हो रहा है कि  ‘ साहित्यसुधा ’  का  जनवरी(प्रथम) ,   2021  अंक अब  https://sahityasudha.com    पर उपलब्ध हो गया है। कृपया साहित्यसुधा की   वेबसाइट   पर जा कर साहित्य का आनंद उठायें। आपसे अनुरोध है कि इसमें प्रकाशित सामग्री पर अपनी प्रति…
एक सजीव चित्रण है : डॉ. पी. पी. सिन्हा अभिनन्दन ग्रंथ
एक सजीव चित्रण है : डॉ. पी. पी. सिन्हा अभिनन्दन ग्रंथ ------------------------------ ------------------------------ -------- संपादक अतुल मल्लिक ‘अनजान’ जी के श्रेष्ठ सम्पादन में प्रकाशित डॉ. पी. पी. सिन्हा अभिनन्दन ग्रंथ एक सजीव चित्रण है | 392 पृष्ठों से सजा आकर्षक मुखपृष्ट सहित डॉ. पी. पी. सिन्ह…
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*राज्य शिक्षा केंद्र म.प्र. द्वारा प्रकाशित द्विभाषी पुस्तकें बच्चों के भाषा कौशल में अहम भूमिका निभाएंगी* 
*राज्य शिक्षा केंद्र म.प्र. द्वारा प्रकाशित द्विभाषी पुस्तकें बच्चों के भाषा कौशल में अहम भूमिका निभाएंगी*    __________________________    राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल द्वारा प्रकाशित द्विभाषी किताबों की सीरीज  आकर्षक , उत्कृष्ट एवं नयनाभिराम तो है ही,पाठ्यसामग्री की दृष्टि से  बेजोड़ भी है। पत्र…
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सुनो जगत अनुनय संदेश
सुनो जगत अनुनय संदेश धनुष उठाओ  हे अवधेश                           संत कबीर की उक्ति "दु:ख में सुमिरन सब करै...." आज भी प्रयोजन युक्त है। दुखिया है कौन! कबीर बाबा बताते हैं कि, ".......दुखिया दास कबीर है....."। अर्थात् जो समाज के बारे में सोचेगा, वह सामाजिक अवमूल्यन देखकर दुख…
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