बुढ़ापा
गुज़रा ज़माना नहीं,वर्तमान भी होता है बुढ़ापा, सचमुच में चाहतें ,अरमान भी होता है बुढ़ापा । केवल पीड़ा,उपेक्षा,दर्द,ग़म ही नहीं, असीमित,अथाह सम्मान भी होता है बुढ़ापा । ज़िन्दगी भर के समेटे हुए क़ीमती अनुभव, गौरव से तना हुआ आसमान भी होता है बुढ़ापा। पद, हैसियत, दौलत,रुतबा नहीं अब भले ही, पर सरल,मधु…
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हमीद के दोहे
जगह जगह पर हैं उगे, नफरत के अब फूल। प्यार  मुहब्बत इस लिये, लोग  रहे  हैं भूल। रब का अपने  नाम तक, लोग  गये  हैं भूल। जब तक  उनके पाँव में,  लगे न कोई शूल। हमीद  सत्ता  लालसा , बड़ी अजब  है चीज़। पागलपन की हद तलक, कुर्सी लगे अज़ीज़। बात करो जब आज की,करते पिछली बात। कौन  सुधारेगा  भला, फिर  बिगड़े  …
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असफलता ।
असफलता  जिसके कल्पना मात्र से  सिहर उठता  में , और विचार निकालने फेंकता  मन से ,किसी कचरे के ढेर में  मगर होनी - अनहोनी को  ना टाल सकता में । अभी तो शायद शुरुआत है  अभी तो ना जाने कितनी  सफलता - असफलता को  छुना है मुझे  असफलता ही तो  सफलता केद्वार  खोलेगी मेरे लिए।  फिर भी न जाने क्यों  असफलता का…
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रंग बदलते रंगों को
रंग बदलते रंगों को स्वारथ की दुनिया मे देखा है। खुद गर्जी की रंगोली में जाल बनाते देखा है। भिन्न कलाओ से श्रृंगारित भिन्न रूप में देखा है। भावो का भँवर घुमाकर  उल्लू सीधा करते देखा है। प्रपंचों के छद्म वेश में स्वयं को बुनते देखा है चटुकरिता के वचनों से अपनी बात बनाते देखा है। मधुर चाल चलन के संग म…
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