ग़ज़ल
नहीं अब कुछ  पुराना चाहता  हूँ। नया   कोई   फ़साना  चाहता  हूँ। गुजारे भर  का  पाना  चाहता  हूँ। नहीं   कोई   ख़ज़ाना  चाहता हूँ। मेरीखातिरहैकाफ़ीइकसनमबस, नहीं  हरगिज़  ज़माना चाहता हूँ। वही  नीचे    गिराना   चाहता  है, जिसे  ऊँचा   उठाना  चाहता  हूँ। सुकूंहासिल जहाँभीहो हमीदअब, वहीं  जा सर नवाना  …
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।।वंदना।।
राम भाव,राम रूप राम छाँव,राम धूप राम आदि,राम अंत राम लक्ष्य,राम पंथ राम देह,राम अदेह राम द्वार,राम गेह राम गंध,राम पुष्प राम आर्द,राम शुष्क आप में ही राम है; राम को निहारिए। राम की अराधना है; राम-राम गाइए।। राम चर,राम अचर राम मुक्ति का डगर राम द्वेष,राम प्रेम राम ही अनंत क्षेम राम व्यय,राम स्रोत रा…
ग़ज़ल
करें   रौशनी   अब   अँधेरा   मिटायें। दिलों  में  बसा है  जो रावन  जलायें। गुनाहों की रोटी  न हरगिज खिलायें। अगर  हो  सके  पाक  रोज़ी  कमायें। मुहब्बत की दुश्मन अगर हों जलायें। रसूमात   बेकार    की   सब   हटायें। करीब अपने आने  न दें नफरतों को, दिये अब मुहब्बत का हर सू जलायें। उनींदे  नहीं काम होने…
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