मेरी प्रत्याशा

चमक चाँदनी की शीतलता से, ह्दय रूप तराशा।
फूलो की ऐसी रंगत,जैसी फूलो की नताशा।।

रह गई है एक, छोटी सी उम्मींद।
जीवन की धूप-छाव से, ना होना निराशा।।

टूट ही जाती है, जीवन की आस।
कदम-कदम पर राहों मे दिखा रहे तमाशा।।

मै मानस हूं तेरे दर का, मेरा नही ठिकाना।
जी लू इस पथ जीवन, को यही मेरी प्रत्याशा।।

कटु वचन को दूर कर,समा ले प्रेम की भाषा।
पास है तेरे प्रेम उमंग,मत होना हताशा।।




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